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*पूरी उम्र ससुराल में गुजारी मैंने**फिर भी मायके से कफ़न मंगाना**मुझे अच्छा नहीं लगता*।😢


*पूरी उम्र ससुराल में गुजारी मैंने*
*फिर भी मायके से कफ़न मंगाना*
*मुझे अच्छा नहीं लगता*।😢

रूपाली टंडन जी की  लिखी यह कविता मुझे बहुत पसंद आई l

*शादीशुदा महिलाओ को कुछ बाते अच्छी नहीं लगती,  पर वे किसी से कहती नहीं ,उन्ही एहसासों को इकट्ठा करके एक कविता लिखी है।*
  
💐 *" मुझे अच्छा नही लगता"*   💐
 
*मैं रोज़ खाना पकाती हूं,*
*तुम्हे बहुत प्यार से खिलाती हूं,*
*पर तुम्हारे जूठे बर्तन उठाना*
*मुझे अच्छा नही लगता।* 😢

*कई वर्षो से हम तुम साथ रहते है, लाज़िम है कि कुछ मतभेद तो होगे,*
*पर तुम्हारा बच्चों के सामने चिल्लाना मुझे अच्छा नही लगता।* 😢

*हम दोनों को ही जब किसी फंक्शन मे जाना हो,*
*तुम्हारा पहले कार मे बैठ कर यू हार्न बजाना*
*मुझे अच्छा नही लगता।* 😢

*माना कि अब बच्चे हमारे कहने में नहीं है,*
*पर उनके बिगड़ने का सारा* *इल्ज़ाम मुझ पर लगाना*
*मुझे अच्छा नही लगता।*😢

*पूरा वर्ष तुम्हारे साथ ही तो रहती हूँ,*
*पर तुम्हारा यह कहना कि,*
*ज़रा मायके से जल्दी लौट* *आना*
*मुझे अच्छा नही लगता।*😢

*तुम्हारी माँ के साथ तो*
*मैने इक उम्र गुजार दी,*
*मेरी माँ से दो बातें करते*
*तुम्हारा हिचकिचाना*
*मुझे अच्छा नहीं लगता।* 😢

*यह घर तेरा भी है हमदम,*
*यह घर मेरा भी है हमदम,*
*पर घर के बाहर सिर्फ*
*तुम्हारा नाम लिखवाना*
*मुझे अच्छा नही लगता।*😢

*मै चुप हूँ कि मेरा मन उदास है,*
*पर मेरी खामोशी को तुम्हारा,*
*यू नज़र अंदाज कर जाना*
*मुझे अच्छा नही लगता।* 😢

*पूरा जीवन तो मैने ससुराल में गुज़ारा है,*
*फिर मायके से मेरा कफन मंगवाना*
*मुझे अच्छा नहीं लगता।*😢

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