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सच्ची दोस्ती पर कहानी (Heart Touching Story in Hindi) part-1


बहुत पुरानी बात हैं रामनगर नामक एक गांव था। उस गांव के लोग बहुत ही गरीब थे। उसी गांव मे रामू और मोहन नाम के दो छोटे बालक भी रहते थे। रामू और मोहन बहुत ही अच्छे दोस्त थे। वे हमेशा एक साथ खेलते थे, साथ मे स्कूल जाते थे, एक दूसरे की हमेशा मदद करते थे। रामू और मोहन दोनों का पढ़ाई मे खूब मन लगता था। धीरे धीरे समय बीत रहा था। एक दिन शहर से रामू के मौसा जी रामू के घर आये। रात मे भोजन करने के बाद रामू के मौसा ने देखा की रामू एक छोटे से दीये के उजाले मे बड़े ध्यान से पढ़ रहा हैं। उन्होंने रामू से कुछ सवाल किये जिसका जवाब रामू ने बड़ी उत्सुकता से दे दिया। रामू की पढ़ाई मे लगन देख कर उसके मौसा जी ने उसको अपने साथ शहर लेकर चले आये और एक अच्छे स्कूल मे नामांकन करवा दिया। अब रामू शहर के एक अच्छे स्कूल मे पढ़ रहा था जबकि उसका दोस्त मोहन गांव के उसी छोटे स्कूल मे।

लगभग 20 साल बाद रामू अपनी सारी पढ़ाई पूरी कर के अपने गांव आया। अब रामू गांव का गरीब लड़का ना होकर एक डॉक्टर बन गया था। घर आते ही रामू दौड़ कर अपने दोस्त मोहन से मिलने गया, उसके घर पहुंचते ही रामू बहुत ही दुखी हुआ और अपने दोस्त मोहन को गले लगाकर रोने लगा। मोहन की दशा बहुत बुरी हो चुकी थी गांव मे वह बहुत ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पाया और गरीबी के कारण कम उम्र से ही मजदूरी करने लगा था। रामू से मिलकर मोहन भी बहुत ख़ुश हुआ।

रामू अब एक डॉक्टर बन चूका था अगर वह चाहता तो शहर जाकर खूब पैसा कमाता मगर उसने ऐसा नहीं किया। रामू गांव मे ही रहकर अपने दोस्त मोहन और पुरे गांव वालों की सेवा करने का मन बना लिया। रामू ने गांव के बगल मे ही एक छोटा सा अस्पताल खोल दिया और अस्पताल का सारा प्रबंधन मोहन को दे दिया। रामू और मोहन दोनों ने खूब मन लगा कर काम किया और कुछ ही सालों मे एक छोटा अस्पताल बहुत बड़ा अस्पताल बन गया। इस प्रकार से रामू ने अपने दोस्त मोहन को गरीबी से निकाला ही नहीं अपितु साथ मे समाज सेवा भी किया।

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