संघ में पहनी जाती है ड्रेस, लेकिन RSS कोई सैन्य संगठन नहीं: मोहन भागवत
'संघ कोई सैन्य संगठन नहीं'
'समाज बदलेगा तो देश बदलेगा'
उन्होंने कहा कि संगीत, बौद्धिक जैसे कार्यक्रम मनुष्य की गुणवत्ता बढ़ाते हैं. जब समाज ठीक रहेगा तो देश बदलेगा और यदि देश का भाग्य बदलना है तो गुणवत्ता वाला समाज बनाना होगा. संघ यही काम कर रहा है, इसके लिए समाज का विश्वास होना जरूरी है. RSS प्रमुख ने कहा कि भले ही भारत आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है लेकिन देश को कुप्रबंधन और लूट से हुए नुकसान की भरपाई करने की जरूरत है और यह काम समाज का है.
उन्होंने कहा, 'हमें 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, लेकिन इसके लिए संघर्ष 1857 में शुरू हुआ था. एक विचार प्रबल हुआ कि हम अपने घर में एक विदेशी शक्ति से हार गए और चीजों को सीधा करने के प्रयास शुरू किए गए. एक निरंतर राजनीतिक और सामाजिक सुधार कार्य हुआ और हमें स्वतंत्रता मिली.’
'आम लोगों को ही लाना होगा बदलाव'
उन्होंने कहा कि यदि देश को बनाना है तो अभी और प्रयास करने होंगे. अव्यवस्थाओं और लूट के कारण देश का जो नुकसान हुआ है, उसको ठीक करने में अभी 10-20 वर्ष और लगेंगे. भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा कि राजनेताओं, सरकार और पुलिस द्वारा लाया गया परिवर्तन कुछ समय तक ही रहता है. यदि इसे समाज का समर्थन नहीं मिलता है तो वह परिवर्तन जल्द ही खत्म हो जाता है.
उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी को जोड़कर, गुणवत्ता बनाकर, देश में हित में काम करने का संकल्प लेकर समाज को खड़ा होना होगा. मोहन भागवत ने कहा कि इस काम के लिए वातावरण बनाने का काम संघ करता है और इसमें सभी के योगदान की जरूरत है. इसके लिए संघ से जुड़ना जरूरी नहीं है. संघ से दूर रहकर, घर से ही सभी को अपना मानकर काम करना होगा.
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