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क्या होते हैं पाप और पुण्य? यहां जानिए 10 पाप और 10 पुण्य

हिंदू धर्मग्रंथ वेदों का संक्षिप्त है उपनिषद और उपनिषद का संक्षिप्त है गीता। स्मृतियां उक्त तीनों की व्यवस्था और ज्ञान संबंधी बातों को क्रमश: और स्पष्ट तौर से समझाती है। पुराण, रामायण और महाभारत हिंदुओं का प्राचीन इतिहास है धर्मग्रंथ नहीं।   विद्वान कहते हैं कि जीवन को ढालना चाहिए धर्मग्रंथ अनुसार। यहां प्रस्तुत है धर्म अनुसार प्रमुख दस पुण्य और दस पाप। इन्हें जानकर और इन पर अमल करके कोई भी व्यक्त अपने जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। धृति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम् ॥ दस पुण्य कर्म- 1.धृति- हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना। 2.क्षमा- बदला न लेना, क्रोध का कारण होने पर भी क्रोध न करना। 3.दम- उदंड न होना। 4.अस्तेय- दूसरे की वस्तु हथियाने का विचार न करना। 5.शौच- आहार की शुद्धता। शरीर की शुद्धता। 6.इंद्रियनिग्रह- इंद्रियों को विषयों (कामनाओं) में लिप्त न होने देना। 7.धी- किसी बात को भलीभांति समझना। 8.विद्या- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का ज्ञान। 9.सत्य- झूठ और अहितकारी वचन न बोलना। 10.अक्रोध- क्षमा के बाद ...

।। गणपति अथर्वशीर्ष पाठ ।।

मन की शांति का अचूक उपाय है गणपति अथर्वशीर्ष ' श्री गणेशाय नम:' ॐ भद्रं कर्णेभि शृणुयाम देवा:। भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:।। स्थिरै रंगै स्तुष्टुवां सहस्तनुभि::। व्यशेम देवहितं यदायु:।1। ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:। स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:। स्वस्ति न स्तार्क्ष्र्यो अरिष्ट नेमि:।। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।2। ॐ शांति:। शांति:।। शांति:।।। ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि। त्वमेव केवलं धर्तासि।। त्वमेव केवलं हर्ताऽसि। त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।। त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्। ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।। अव त्वं मां।। अव वक्तारं।। अव श्रोतारं। अवदातारं।। अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।। अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।। अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।। अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।। सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।3।। त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय। त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।। त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि। त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।4। ॐ नमस्ते गणपतये। त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।। त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि। त...

श्रीगणेश पूजन की सबसे सरल विधि(part_2)

श्रीगणेश पूजा अपने आपमें बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है। चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो। - अर्थात्‌ जब कभी किसी व्यक्ति को किसी अनिष्ट की आशंका हो या उसे नाना प्रकार के शारीरिक या आर्थिक कष्ट उठाने पड़ रहे हो तो उसे श्रद्धा एवं विश्वासपूर्वक किसी योग्य व विद्वान ब्राह्मण के सहयोग से श्रीगणपति प्रभु व शिव परिवार का व्रत, आराधना व पूजन करना चाहिए। श्रीगणेश चतुर्थी को पत्थर चौथ और कलंक चौथ के नाम भी जाना जाता है। यह प्रति वर्ष भाद्रपद मास को शुक्ल चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि को श्री गणपति भगवान की उत्पत्ति हुई थी इसलिए इन्हें यह तिथि अधिक प्रिय है। जो विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक भगवान भी कहा जाता है। * पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित ...

श्री गणेश पूजन की सरल प्रामाणिक विधि(part_1)

 ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम:!! ... श्री गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की सरलतम विधि से पूजन करें। भगवान गणेश जी की पूजन में वेद मंत्र का उच्चारण किया जाता है। जिन्हें वेद मंत्र न आता हो, उनकों नाम-मंत्रों से पूजन करना चाहिए।   स्नान करने के पश्चात अपने पास समस्त सामग्री रख लें फिर आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठकर तीन बार निम्न मंत्र बोलकर आचमन करें।   ॐ केशवाय नम:  ॐ नारायणाय नम: ॐ माधवाय नम:   आचमन के पश्चात हाथ में जल लेकर 'ॐ ऋषिकेशाय नम: बोलकर हाथ धो लें। हाथ धोने के बाद पवित्री धारण करें, पवित्री के बाद बाएं हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजन सामग्री पर छिड़क ले। ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्ष पुनातु बोलकर गणेश जी एवं अम्बिका (सुपारी में मौली लपेटकर) को स्थापित करें निम्न मंत्र बोलकर आवाहन करें।   ॐ गणेशाम्बिकाभ्यां नम:!!    फिर कामना-विशेष का नाम लेकर संकल्प ले लें, अर्थात दाहिने हाथ में जल, सुपारी, सिक्का, फूल एवं चावल लेकर जिस निमित्त पूजन कर रहे है उसका मन में उच्चारण करके थाली या गणेश...

*🙏🏻ગુરુ શિષ્યની સત્યકથા🙏🏻*

*મલ્લાપુરમ એ કેરળમાં આવેલું નાનું શહેર છે એક શિક્ષિત બહેન રેલવેની ભીડને ચીરતા ખુબ ઉતાવળેથી પોતાના ઘરે જઈ રહ્યાં છે અને ઓચિંતી તેની નજર એક ગરીબ ભીખારણ પર પડી. કંઈક વિચાર વલોંંણું ઉઠ્યું. અને દ્રષ્ટિ ત્યાં થંભી જાય છે. અને અચાનક તેમના ડગ આગળ વધતા અટકી જાય છે.*   *ધીમે રહી પોતાની નજર પાછળ ઘુમાવી એ પેલી ભીખારણ પાસે જાય છે. ધ્યાનથી જોતાં તેમનો ચહેરો સહેજ પરિચિત લાગે છે. તેમનું નામ ખૂબ નમ્ર ભાવે પૂછતાં એ ભીખારણ પોતાનું નામ જણાવે છે. એ સાંભળતા જ બહેન ધ્રુસકે ને ધ્રુસકે રડવા લાગે છે.*     *આ એ જ એનાં પથદર્શક મેથ્સનાં ટીચર જે તેના જેવા હજારો વિદ્યાર્થીઓનાં પ્રેરણાદાયક પ્રતિમા છે. તે બહેન ગમગીન થઈ જાય છે. તે ભિખારણ પાસે બેસીને પુછે છે મને ઓળખો છો ? હું તમારી પ્રિય વિદ્યાર્થિની પ્રિયંકા. ભિખારણ અમીટ દ્રષ્ટિથી પ્રિયંકાને જોઈ રહે છે. અને સ્વયંભૂ એના હાથ ફેલાઈ જાય છે.પ્રિયંકા તેની બાહોમાં સમાઈ જાય છે. આ ગંદી ગોબરી ભિખારણ અને સ્વચ્છ સુથરી યુવતિનું મિલન લોકોને કુતુહલ જગાડે છે. બંનેની આંખોમાં શ્રાવણ ભાદરવો સાગમટે ઊમટી પડે છે.* *થોડીવાર બાદ બંને સ્વસ્થ થાય છે. પ્રિયંકાએ ભિખારણ...

गणेश नमस्कार से होता है चमत्कार...कैसे करें श्री गणेश का ध्यान

गणेश नमस्कार से होता है चमत्कार... कैसे करें श्री गणेश का ध्यान 🤗ली-प्रतिक भट्ट यूं तो किसी भी पूजा से पहले भगवान गणेश की पूजा करने का विधान और परंपरा है, लेकिन गणेशजी को प्रसन्न कर अपने मनोरथ पूर्ण किए जा सकते हैं। भाद्रपद माह तो वैसे भी गणेशजी का मास माना जाता है। तंत्र शास्त्रों में गणेशजी के कई रूप बतलाए गए हैं, जिनकी उपासना करने सभी सभी अभीष्ट सिद्ध होते हैं। तंत्र शास्त्र में वर्णित गणेशजी के रूप हैं... 1 . सुमुख, 2 . एकदंत, 3 . कपिल, 4 . गजकर्ण, 5 . लंबोदर, 6 . विकट, 7 . विघ्ननाशक, 8 . विनायक, 9 . धूम्रकेतु, 10 . गणाध्यक्ष, 11 . भालचन्द्र, 12 . गजानन, 13 . विघ्नेश, 14 . परशुपाणि, 15 . गजास्य और  16 . शूर्पकर्ण । चमत्कार को नमस्कार करना मा न व स्वभाव है, लेकिन कल्पना करिए यदि नमस्कार से ही चमत्कार हो जाए तो... देवों में अग्रगण्य गणेश को केवल नमस्कार कर इसका प्रभाव जाना जा सकता है और मनोकामना पूर्ण की जा सकती है। गणेश अथर्वशीर्ष का अर्थ समझकर और पाठ करने मात्र से चमत्कार का अनुभव किया जा सकता है। गणेश जी का बीजमंत्र (गं) और (ग:) है। इसका उच्चारण 'गम्...

◠◡◠ joke with knowledge ◠◡◠ part_1

◠◡◠  joke with knowledge  ◠◡◠         જ્ઞાન સાથે ગમ્મત ● જીવન માં વિચારવા જેવું ..... સ્વપ્ન ત્યાં સુધી સપના જ રહેશે. જ્યા સુધી તમે મહેનત કરી આકાર નહી આપો. એટલુ યાદ રાખવું કે.....  આપણે પાણી ને હાથ માં નથી પકડી સકતા પરતું બરફ અવશ્ય હાથ માં ટકી શકે છે... ● " તક ઝડપી લો " એક યુવાનની ઇચ્છા હતી કે રાજ્યના પ્રધાનની અતિ સુંદર દીકરી સાથે તેનાં લગ્ન થાય. એક દિવસ તે હિંમતથી પોતાની ઇચ્છા જણાવવા પ્રધાન પાસે ગયો. પ્રધાને તેને નજરથી માપીને કહ્યું, ‘દીકરા, મારી એક શરત છે. જે મારી  પરીક્ષામાં પાસ થશે તેને જ હું મારી પુત્રી પરણાવીશ. તું સામેના મેદાનમાં જઈને ઊભો રહે. હું ત્રણ આખલા છૂટા મૂકીશ. એક પછી એક એ ત્રણે મેદાનમાં દાખલ થશે અને ત્યારે એમાંના એકની પણ પૂંછડી તું પકડી શકીશ તો મારી દીકરી તને પરણાવીશ.’ યુવાન તો મેદાનમાં જઈને ઊભો રહી ગયો. થોડી વાર થઈ ત્યાં એક હૃષ્ટપુષ્ટ અને જંગલી આખલો મેદાનમાં પ્રવેશ્યો. યુવાને આવો આખલો અગાઉ કદી જોયો નહોતો. તેણે મનોમન નક્કી કર્યું કે આના કરતાં હવે પછી જે આખલો આવે એની પૂંછડી પકડવી બહેતર રહેશે. આથી તે બાજુ પર ખસી ગયો અને પ...